करता कारक 1, ने,सप्रत्येय करता कारक का चिन्ह है। किंतु से के द्वारा और के जरिए हिंदी में प्रधान अर्थ की और इंगित करते हैं। जैसे मुझे काम ना सड़ेगा। उसके द्वारा यह कथा सुनी थी। आपके जरिए ही घर पता चला। तीर से बैग मार दिया गया। 2, भूख, प्यास ज्यादा आंख कान पाव इत्यादि शब्द आदि एक वचन करण कारक में सब प्रत्यय रहते हैं तो एक वचन होते हैं और आप प्रत्यय रहते हैं तो बहुवचन। जैसे वह भूख से बेचैन है, वह भूखों बेचैन है। लड़का प्यार से मार रहा है, लड़का फ्यसो मार रहा है। स्त्री जाने से कांप रही है। स्त्री जड़ों कहां पर है। मैंने अपनी आंखों से यह घटना देखी, मैंने अपनी आंखों या घटना देखी। कान से सुनी बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए, कानों सूनी बातपर विश्वास नहीं करना चाहिए। लड़का अबअपने पांव से चलता है, लड़का अब अपने पांवो चलता है।
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करण कारक हिंदी व्याकरण,
करण कारक, जिस वस्तु की सहायता से यह जिसके द्वारा कोई काम किया जाता है, उसे करण कारक कहते हैं। दूसरे शब्दों में वाक्य में जिस शब्द से क्रिया के संबंध का बोध हो उसे करण कारक कहते हैं। किसकी विभक्ति से है। जैसे हम आंखों से देखते हैं । इस वाक्य में देखने की क्रिया करने के लिए आंख की सहायता ली ली गई है। इसलिए आंखों से करण कारक है। करण कारक के सबसे अधिक है पर तबीयत चिन्ह है। ने भी करण कारक का ऐसा चिन्ह है जो करण कारक के रूप में संस्कृत में आए करता के लिए उनके रूप में कर्मवाच्य और भाववाचक में आता है। किंतु हिंदी की प्रकृति ने को सब प्रत्यय करता कारक का ही चिन्ह माना है। हिंदी में करण कारक के अन्य चिन्ह है से द्वारा के द्वारा के जरिए के साथ के बिना इत्यादि । के साथ के बिना आदि साधनात्मक योग योग के कारण साधनात्मक योग बताने वाले के द्वारा की ही तरह के करण कारक के चिन्ह है। करण का अर्थ है साधन। सत्ता से चिन्ह वही करण कारक का चिन्ह है जहां साधन के अर्थ में प्रयुक्त है। जैसे मुझे यह काम ना हो सकेगा। यहां मुझे का अर्थ है मेरे द्वारा मुझे साधन भूत के द्वारा यह मूंछ जैसे साधन के द्वारा। तथा साधन को इंगित करने के कारण यह मुझे का से कारण का विभक्ति किया है। अपादान का भी विभक्ति चिन्ह से है। अपादान का अर्थ है अलगाव की प्राप्ति। कथा अपादान काशी चिन्ह लगाओ के संकेत का प्रतीक है जबकि कारण का अपादान के विपरीत साधना का साधन भूत लगाओ का। पेड़ से फल गिरा मैं घर से चला आदिवासियों में से पर्याप्त पेड़ को यह घर को साधन नहीं सिद्ध करता बल्कि इस दोनों से बिलगांव सिद्ध करता है। कथा इन दोनों वाक्य में घर और पेड़ के आगे प्रयुक्त से विभक्ति चिन्ह अपरदन कारक का है और इन दोनों शब्दों में लगाकर का पद बनता है। करण कारक का क्षेत्र अन्य सभी कारकों से विस्तृत है। इस कारण में अन्य समस्त कारकों से छूटे हुए प्रयुक्त या वे पद जो अन्य किसी कारक में आने से बच गए हो या जाते हो। कथा इसकी कुछ सामान्य पहचान और नियम जान लेना आवश्यक है। एक से कारण और अपादान दोनों विभक्ति क्यों का चिन्ह है किंतु साधन बहुत का प्रत्यय होने पर कारण माना जाएगा जबकि अलगाव का प्रयोग होने परआपदा। जैसे वह कुल्हाड़ी से वृक्ष काटता है। मुझे अपनी कमाई खाना मिलता है। साधुओं की संगीत से बुद्धि सुधरता है। यह तीनों कारण है। पेड़ से फल गिरा। घर से लौटा हुआ लड़का। छत से उतरी हुई लता। यह तीनों अपादान है।

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कारक कैसे की परिभाषा, हिंदी व्याकरण





















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